जालंधर: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के जालंधर जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ‘इंडियन को-ऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी लिमिटेड’ के सेक्रेटरी अजय सहगल के खिलाफ मोहाली की विशेष पीएमएलए (PMLA) अदालत में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (चार्जशीट) दाखिल की है। अजय सहगल पर जाली सहमति पत्रों (Consent Letters) के आधार पर ‘चेंज ऑफ लैंड यूज’ (CLU) और रेरा (RERA) रजिस्ट्रेशन हासिल कर लगभग 348 करोड़ रुपये की अवैध कमाई (Proceeds of Crime) को लॉन्डर करने का गंभीर आरोप है।
108 एकड़ कृषि भूमि का फर्जी तरीके से बदला इस्तेमाल
ईडी की जांच में सामने आया कि आरोपी अजय सहगल ने पंजाब के ‘टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट’ में कृषि भूमि के फर्जी सहमति पत्र जमा किए थे। इसके आधार पर ‘सनटेक सिटी’ नामक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के लिए 108.58 एकड़ कृषि भूमि को रिहायशी और व्यावसायिक प्लॉट में बदलने की मंजूरी (CLU) ली गई। बाद में इसी फर्जी सीएलयू के जरिए ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) से लाइसेंस और रेरा (RERA) रजिस्ट्रेशन भी हासिल कर लिया गया।
RERA मंजूरी के बिना बेचे प्लॉट, EWS जमीन भी नहीं की ट्रांसफर
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाईं:
- रेरा रजिस्ट्रेशन मिलने से पहले ही प्रोजेक्ट में प्लॉट और रिहायशी यूनिट्स बेचना शुरू कर दिया था।
- जीमाडा (GMADA) से कंप्लीशन सर्टिफिकेट लिए बिना ही जमीन मालिकों को कब्जा दिया जाने लगा।
- लाइसेंस की शर्तों के अनुसार ‘इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन’ (EWS) के लिए आरक्षित जमीन जीमाडा को ट्रांसफर नहीं की गई।
- ‘ला कैनेला फेज 2’ में बिना किसी रेरा मंजूरी के धड़ल्ले से रेजिडेंशियल यूनिट्स बेची गईं।
जीमाडा की ढिलाई से बढ़ता गया घोटाला
ईडी के मुताबिक, जीमाडा को 2020 से ही जाली दस्तावेजों की शिकायतें मिलने लगी थीं, लेकिन आरोपियों के खिलाफ समय रहते कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। इससे आरोपियों को धोखाधड़ी से ली गई मंजूरी के जरिए अवैध कमाई जारी रखने का मौका मिला।
मई में गिरफ्तारी, 348 करोड़ रुपये का घोटाला उजागर
मामले में ईडी ने मई और जून 2026 में कई ठिकानों पर छापेमारी कर डिजिटल सबूत और 30.98 लाख रुपये का अनअकाउंटेड कैश जब्त किया था। पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड पाए जाने पर अजय सहगल को 22 मई को पीएमएलए कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था। जांच के अनुसार, अपराध से हुई कुल 348 करोड़ रुपये की कमाई में 212.58 करोड़ रुपये की बिक्री और 135.41 करोड़ रुपये की बिना बिकी इन्वेंट्री शामिल है।

