भारत में होने वाले G20 सम्मेलन के मद्देनजर, इस बार की डीजीपी-आईजीपी कॉन्फ्रेंस बहुत अहम रहेगी। मोदी सरकार में यह तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस आठ साल बाद नई दिल्ली में आयोजित होने जा रही है। जनवरी के तीसरे-चौथे सप्ताह में शुरू होने वाली इस कॉन्फ्रेंस में आतंकवाद, काउंटर टेररिज्म फाइनेंसिंग, आतंकी गतिविधियों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल, इंटेलिजेंस तथा इन्वेस्टीगेशन एजेंसियों के बीच कोऑपरेशन, कोआर्डिनेशन व कोलेबोरेशन बढ़ाना, जैसे विषयों पर मंथन होगा। ट्रेस, टारगेट और टर्मिनेट की स्ट्रेटेजी को निम्नस्तरीय आर्थिक अपराध से लेकर संगठित आर्थिक अपराध तक अपनाने की रणनीति तैयार होगी। चूंकि जी-20 सम्मेलन से जुड़ी कई बैठकें विभिन्न राज्यों में प्रस्तावित हैं, इसके मद्देनजर वहां सुरक्षा इंतजाम को लेकर भी डीजी-आईजी कॉन्फ्रेंस में चर्चा की जाएगी। इस कॉन्फ्रेंस में पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हिस्सा लेंगे।
मोदी सरकार में दिल्ली से बाहर होती रही है यह कॉन्फ्रेंस
हालांकि एक दशक पहले तक यह कॉन्फ्रेंस दिल्ली में आयोजित होती रही है। साल 2014 में नरेंद्र मोदी ने जब प्रधानमंत्री का पद संभाला तो उन्होंने इस कॉन्फ्रेंस को दिल्ली से बाहर आयोजित कराने का निर्णय लिया। उसी वर्ष डीजी-आईजी कॉन्फ्रेंस पहली बार, असम की राजधानी दिसपुर में आयोजित की गई थी। साल 2015 में यह कॉन्फ्रेंस, गुजरात के कच्छ में आयोजित की गई। इसके बाद 2016 में इस कॉन्फ्रेंस को हैदराबाद में आयोजित किया गया। वर्ष 2017 में डीजी-आईजी कॉन्फ्रेंस, उत्तराखंड के टनकपुर में आयोजित की गई। साल 2018 में यह कॉन्फ्रेंस, दोबारा से गुजरात के केवाडिया में हुई। इसके बाद 2019 में महाराष्ट्र के पुणे में इस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। साल 2020 में कोविड-19 के चलते वर्चुअली कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। वर्ष 2021 में डीजी-आईजी कॉन्फ्रेंस उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित की गई थी। नवंबर में आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भाग लिया था।
इन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा
इस कॉन्फ्रेंस में कई बड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। सोशल मीडिया का दुरुपयोग, आतंकवाद, साइबर अटैक, ड्रोन के जरिए हथियार व ड्रग की सप्लाई, काउंटर-टेररिज्म फाइनेंसिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और गैर कानूनी कार्यों के लिए वर्चुअल एसेट्स का इस्तेमाल, आदि विषयों पर बातचीत होगी। देश में आतंकी घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क स्थापित करने पर जोर रहेगा। नेक्स्ट जेनेरेशन टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग के खिलाफ एक मजबूत तंत्र विकसित करने पर चर्चा होगी। संयुक्त तौर पर टेररिज्म, नारकोटिक्स और आर्थिक अपराध पर कैसे रोकथाम लगे, इस बाबत कॉन्फ्रेंस में एक प्रभावी मेकेनिज्म तैयार किया जा सकता है। ऐसे अपराधों में त्वरित कार्रवाई करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विकसित किए जा रहे डेटाबेस के इस्तेमाल पर बातचीत होगी।
युवाओं को गुमराह करने वालों पर होगा प्रहार
देश में कुछ संगठन अपनी सामाजिक गतिविधियों की आड़ में युवाओं को गुमराह करके उन्हें आतंक की राह पर धकेल रहे हैं। केंद्र सरकार, ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्ती से पेश आएगी। इस तरह की घटनाएं कई राज्यों में देखी गई हैं। इसी कड़ी में एनआईए द्वारा पीएफआई पर कड़ी चोट की गई है। जांच एजेंसी की रिपोर्ट पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस संगठन पर बैन लगा दिया है। जो टेररिस्ट ग्रुप्स, इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी और साइबर स्पेस की मदद लेकर अपनी गतिविधियों को बढ़ाना चाहते हैं, सरकार उन पर बड़ा प्रहार करेगी। टेररिस्ट ग्रुप्स का नारकोटिक्स जैसे संगठित अपराधों में शामिल होना, टेरर फाइनेंसिंग के लिए क्रिप्टो करेंसी तथा हवाला का इस्तेमाल, इन सबके खिलाफ डीजी आईजी कॉन्फ्रेंस में रणनीति तैयार होगी। टेरर फाइनेंसिंग के सभी चैनलों की पहचान कर उन्हें जल्द से जल्द कैसे खत्म किया जाए, यह विषय भी कॉन्फ्रेंस में रखा जाएगा। मौजूदा समय में आतंकी समूह, हिंसा को अंजाम देने, युवाओं को रेडिक्लाइज करने तथा वित्त संसाधन जुटाने के लिए नए तरीके खोज रहे हैं। ऐसे आतंकी, अपनी पहचान छिपाने के लिए और रेडिकल मैटेरियल को फैलाने के लिए डार्क-नेट का उपयोग कर रहे हैं। सभी राज्यों की पुलिस, डार्क-नेट पर चलने वाली इन गतिविधियों के पैटर्न को समझने और उस पर रोक लगाने में सक्षम हो, इसके लिए उन्हें तकनीकी एवं उपकरणों से लैस किया जाएगा।

