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Friday, May 22, 2026

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‘विदेशी शोध जहाजों को लेकर श्रीलंका बनाएगा राष्ट्रीय नीति’; श्रीलंकाई विदेश मंत्री ने दी जानकारी

श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ ने शुक्रवार को कहा कि श्रीलंका जल्द ही विदेशी शोध जहाजों की यात्राओं की अनुमति देने पर राष्ट्रीय नीति तैयार करेगा। यह बात चीनी निगरानी जहाजों की लगातार डॉकिंग अनुरोधों के बीच कही गई है, जिससे भारत में चिंताएं बढ़ गई हैं। 

विदेश मंत्री विजिता हेराथ की यह टिप्पणी श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके की भारत यात्रा के कुछ दिनों बाद आई है। जनवरी में, श्रीलंका ने अपने जलक्षेत्र और विशेष आर्थिक क्षेत्र में संचालित विदेशी समुद्री वैज्ञानिक अनुसंधान सर्वेक्षण जहाजों पर एक साल का प्रतिबंध लगा दिया था, क्योंकि भारत और अमेरिका ने उच्च तकनीक वाले चीनी निगरानी जहाजों की लगातार डॉकिंग अनुरोधों के बाद सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताएं जताई थीं। 

प्रतिबंध की उचित समीक्षा होगी- विजिता हेराथ
विदेश मंत्री ने कहा कि अनुसंधान जहाजों की अनुमति देने पर श्रीलंका का प्रतिबंध अभी भी लागू है, जिसकी उचित समीक्षा की जाएगी। वहीं भारत से कोलंबो लौटने पर राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने चीन के एक शीर्ष सरकारी अधिकारी के साथ बैठक की, जिन्होंने चीन की इच्छा व्यक्त की कि चीनी अनुसंधान जहाज कोलंबो में अपनी यात्राएं फिर से शुरू करें। यह पूछे जाने पर कि क्या भारत ने दिसानायके के भारत प्रवास के दौरान ऐसी यात्राओं पर चिंता जताई थी, हेराथ ने कहा कि भारत की चिंताएं उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा खतरों पर आधारित थीं।

भारतीय सुरक्षा चिंताओं पर हमने दिया आश्वासन- हेराथ
हेराथ ने कहा, ‘हमने आश्वासन दिया है कि हम अपनी भूमि का उपयोग करके भारतीय सुरक्षा चिंताओं को खतरे में डालने वाली किसी भी कार्रवाई की अनुमति नहीं देंगे।’ हेराथ ने कहा, ‘यह यात्रा ऐसी यात्रा साबित हुई है, जिसके बाद श्रीलंका के लोगों को कई उपलब्धियां हासिल हुई हैं।’ उन्होंने कहा, इसने संबंधों को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। हेराथ ने कहा कि राष्ट्रपति दिसानायके की यात्रा के दौरान भारत और श्रीलंका ने श्रीलंकाई लोक सेवा अधिकारियों के प्रशिक्षण और दोहरे कराधान को रोकने पर दो समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करने के अलावा कोई औपचारिक समझौता नहीं किया।

श्रीलंकाई विदेश मंत्री नेकहा, हमने केवल आर्थिक और प्रौद्योगिकी सहयोग समझौते (ईटीसीए) से संबंधित वार्ता को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। किसी भी चीज पर कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है।

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