अहमदाबाद: अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे शातिर अपराधी को गिरफ्तार किया है, जिसकी कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। साल 2008 में हत्या के एक मामले में उम्रकैद की सजा पाने वाला हेमंत मोदी नाम का एक वकील, छह साल जेल में काटने के बाद पैरोल पर फरार हो गया था। इसके बाद उसने अपनी पहचान बदलकर मुंबई का रुख किया और वहां कई फिल्मों, टीवी सीरियल्स और वेब सीरीज में बतौर अभिनेता काम करने लगा। आखिरकार, अहमदाबाद में ही एक सीरियल की शूटिंग के दौरान पुलिस ने जाल बिछाकर उसे धर दबोचा।
शूटिंग के दौरान गिरफ्तारी, पहचानना था मुश्किल
अहमदाबाद क्राइम पुलिस इंस्पेक्टर पीएम धाकड़ा ने इस अजीबोगरीब गिरफ्तारी का ब्यौरा देते हुए बताया, “जब हमारी टीम गुजराती धारावाहिक ‘मोटी बानी नानी बहू’ के सेट पर काम कर रहे इस एक्टर को गिरफ्तार करने गई, तो उसका अभिनय और बदली हुई पहचान इतनी शानदार थी कि उसे पहचानना लगभग नामुमकिन था। हालांकि, उसकी पुरानी गिरफ्तारी के समय दर्ज किए गए शरीर के निशानों (Identification Marks) का मिलान करने के बाद जब कड़ी पूछताछ की गई, तो उसने कबूल कर लिया कि वही हेमंत मोदी है जो 12 साल से पुलिस की गिरफ्त से भाग रहा था।”
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पड़ोसी से झगड़ा और हत्या का मामला
केस के तथ्यों के मुताबिक, वारदात से पहले हेमंत मोदी अहमदाबाद के नरोदा (सैजपुर बोघा) स्थित दासकी चॉल में रहता था। 12 जून 2005 को एक पड़ोसी से हुए विवाद के बाद हेमंत ने अपने भाई और दोस्तों के साथ मिलकर पड़ोसी के दोस्त नरेंद्र ताम्बले उर्फ नन्नो की बेरहमी से हत्या कर दी थी। हेमंत खुद एक वकील था, इसलिए उसने खुद समेत अपने साथ गिरफ्तार हुए सातों आरोपियों का केस अदालत में लड़ा। हालांकि, 2008 में तीन साल चले ट्रायल के बाद कोर्ट ने सभी सातों को उम्रकैद की सजा सुना दी।
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जेल मैनुअल का फायदा उठाकर हुआ ट्रांसफर और फिर फरार
कानून का जानकार होने के कारण हेमंत जेल मैनुअल के नियमों से अच्छी तरह वाकिफ था। साबरमती जेल में रहते हुए उसने तत्कालीन जेलर के खिलाफ याचिका दायर की और खुद को डिप्रेशन का मरीज बताया। इस पैंतरे के बाद उसका ट्रांसफर मेहसाणा जेल कर दिया गया। अदालत के फैसले के छह साल बाद, उसे गुजरात उच्च न्यायालय से 30 दिनों की पैरोल मिली। पैरोल पर बाहर आते ही वह फरार हो गया और मुंबई जाकर एक्टिंग में अपना करियर बनाने लगा, जिसका अंत अब सलाखों के पीछे हुआ है।

