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Sunday, July 5, 2026

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जंतर-मंतर पर सीजेपी (CJP) का आंदोलन 15वें दिन भी जारी: पीएम मोदी को लिखा खुला पत्र, पेपर लीक और छात्र आत्महत्याओं पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जवाबदेह ठहराने की मांग

नई दिल्ली: नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक के खिलाफ छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन लगातार उग्र होता जा रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शनिवार (4 जुलाई 2026) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक भावुक और कड़ा खुला पत्र लिखकर इस पूरे गतिरोध पर अपनी चुप्पी तोड़ने की विधिक व नैतिक अपील की है।

दो पन्नों के इस पत्र, जिसका शीर्षक ‘इंसानियत का एक सवाल: आप कब तक जंतर-मंतर को नज़रअंदाज़ करते रहेंगे?’ है, के माध्यम से पार्टी ने मांग की है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बार-बार हो रहे पेपर लीक और देश में बढ़ रहे छात्रों की आत्महत्या के मामलों के लिए सीधे तौर पर जवाबदेह ठहराया जाए।

1. सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का 7वां दिन

जंतर-मंतर पर चल रहे इस विधिक व शांतिपूर्ण आंदोलन का ढांचा अब बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है:

  • अनिश्चितकालीन अनशन: विख्यात सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक व्यापक शिक्षा सुधारों और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग को लेकर पिछले सात दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
  • 15 दिनों से प्रदर्शन: छात्रों और सीजेपी कार्यकर्ताओं का यह संयुक्त धरना प्रदर्शन 20 जून 2026 से लगातार जारी है और आज इसने अपने 15 दिन पूरे कर लिए हैं।

2. छात्र आत्महत्याओं के बढ़ते आंकड़े और पेपर लीक का मुद्दा

पार्टी ने अपने पत्र में देश के भीतर छात्रों के मानसिक तनाव और शैक्षणिक विफलता को लेकर बेहद डराने वाले आंकड़े साझा किए हैं:

आंदोलन के मुख्य विधिक बिंदु और आंकड़े⎩⎧​आत्महत्या के मामले:परीक्षाओं में धांधली:जवाबदेही का अभाव:​प्रदर्शन शुरू होने से पहले छात्र आत्महत्या के 11 मामले थे, जो अब बढ़कर **29** हो गए हैं।**NEET-UG** सहित कई राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित विधिक व तकनीकी चूक और पेपर लीक।आरोप है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इन गंभीर विधिक चूकों की कोई नैतिक जिम्मेदारी नहीं ली।​

3. दिल्ली पुलिस पर किताबों के अपमान और बदसलूकी का आरोप
सीजेपी ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में दिल्ली पुलिस की विधिक भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने छात्रों के साथ अभद्र व्यवहार किया और उनके द्वारा बनाई गई एक छोटी लाइब्रेरी को नष्ट कर दिया। पत्र में दावा किया गया है कि छत्रपति शिवाजी महाराज, डॉ. भीमराव आंबेडकर और शहीद भगत सिंह से जुड़ी ऐतिहासिक व विधिक किताबों को कीचड़ में फेंककर उनका अपमान किया गया। पार्टी ने इस विधिक उल्लंघन के लिए जिम्मेदार दो पुलिस अधिकारियों को तुरंत निलंबित करने की मांग की है।

4. “हमें आतंकवादी कहा गया” — अपमानजनक टिप्पणियों पर कड़ा ऐतराज

पत्र में केंद्र सरकार के रुख की कड़े शब्दों में निंदा की गई है। सीजेपी का आरोप है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से न्याय मांग रहे आंदोलनकारियों को “आतंकवादी” कहकर संबोधित किया, जबकि सत्तारूढ़ दल के अध्यक्ष ने भी देश के युवाओं के खिलाफ विधिक रूप से आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियां कीं। पार्टी ने कहा कि सरकार युवाओं से विधिक संवाद स्थापित करने के बजाय उनका दमन कर रही है।

कई राष्ट्रीय नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मिला समर्थन

इस छात्र आंदोलन को देश के विभिन्न कद्दावर विपक्षी नेताओं और नागरिक समाज के विधिक प्रतिनिधियों का व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ है:

  • वामपंथी नेता: माकपा (CPIM) के एम. ए. बेबी व वृंदा करात, भाकपा (CPI) के डी. राजा व एनी राजा और सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के दीपांकर भट्टाचार्य।
  • सामाजिक व विधिक कार्यकर्ता: योगेंद्र यादव, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज और निखिल डे।
  • संसद सदस्य: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद सागरिका घोष और महुआ मोइत्रा।

आंदोलनकारियों का स्पष्ट विधिक रुख है कि जब तक नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की विधिक कमियों को दूर नहीं किया जाता और छात्रों को पारदर्शी न्याय नहीं मिलता, यह अनशन समाप्त नहीं होगा।

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