नई दिल्ली:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित नए वैश्विक टैरिफ पर भारत ने शुक्रवार को अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि उसने अमेरिका के इस फैसले का संज्ञान लिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई अमेरिकी व्यापार कानून के सेक्शन 301 (Section 301) के तहत की गई एक प्रवर्तन (Enforcement) कार्रवाई है।
साथ ही विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA – Bilateral Trade Agreement) को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत लगातार जारी है।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
अपनी साप्ताहिक प्रेस वार्ता के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा:
“हमने अमेरिकी घोषणा का संज्ञान लिया है। यह सेक्शन 301 के तहत की गई प्रवर्तन कार्रवाई है, जिसकी शुरुआत अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ संबंधी फैसले के बाद हुई थी। इस विषय पर भारत अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर चुका है। अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने के उद्देश्य से वार्ता चल रही है।”
USTR की टैरिफ घोषणा और वजह
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने ‘ट्रेड एक्ट, 1974’ के सेक्शन 301 के तहत 60 अर्थव्यवस्थाओं पर 10% से 12.5% तक के नए टैरिफ लागू करने का ऐलान किया है, जो शुक्रवार से प्रभावी हो चुके हैं।
अमेरिका का तर्क है कि जिन देशों ने ‘फोर्स्ड लेबर’ (जबरन श्रम) से बने सामानों के आयात पर पर्याप्त कानूनी रोक नहीं लगाई है, उनके खिलाफ यह दंडात्मक कार्रवाई की गई है।
भारत 10% टैरिफ वाली श्रेणी में शामिल
अमेरिकी टैरिफ व्यवस्था में देशों को दो श्रेणियों में बांटा गया है:
| श्रेणी | शुल्क (Tariff) | शामिल प्रमुख देश/अर्थव्यवस्थाएं |
| निचला समूह | 10% | भारत, ब्रिटेन, कनाडा, मेक्सिको, इंडोनेशिया, बांग्लादेश सहित 17 देश |
| उच्च समूह | 12.5% | जांच के दायरे में आई अन्य 43 अर्थव्यवस्थाएं |
| विशेष दरें | 10% से 12.5% | यूरोपीय संघ (EU), जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और स्विट्जरलैंड |
10% श्रेणी में कैसे आया भारत?
सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में भारत को 12.5% वाले उच्च टैरिफ समूह में डालने का प्रस्ताव था। हालांकि, श्रम मानकों पर अमेरिका के साथ भारत की रचनात्मक और सकारात्मक बातचीत के बाद भारत को 10% वाली श्रेणी में रखा गया। 10% टैरिफ उन देशों पर लागू हुआ है जिन्होंने जबरन श्रम रोकने के लिए कानून बनाए हैं या प्रतिबद्धता जताई है।
सेक्शन 301 की पृष्ठभूमि
मार्च में USTR ने 60 देशों के खिलाफ जांच शुरू की थी, जिसमें 1,600 से अधिक लिखित टिप्पणियों और जनसुनवाई का विश्लेषण किया गया। हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए कुछ टैरिफ को अवैध करार दिए जाने के बाद, ट्रंप प्रशासन ने अपनी व्यापार नीतियों को लागू करने के लिए सेक्शन 301 का कानूनी रास्ता चुना है।

