नई दिल्ली: ट्रेनों और रेलवे परिसरों में सुरक्षा तथा अपराधों के मामलों में कार्रवाई को लेकर अक्सर यात्रियों के मन में भ्रम बना रहता है। इसी मुद्दे पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में स्थिति बिल्कुल स्पष्ट कर दी है। उन्होंने बताया कि रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत किसी भी अपराध में एफआईआर (FIR) दर्ज करने का अधिकार नहीं है।
रेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि बीएनएस से जुड़े सभी मामलों में प्राथमिक दर्ज करने, जांच करने और कानूनी कार्रवाई की सीधी जिम्मेदारी सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) या संबंधित जिला पुलिस की होती है।
RPF और GRP के अधिकारों में क्या है बड़ा अंतर?
राज्यसभा में एक सवाल के लिखित उत्तर में रेल मंत्री ने RPF और GRP के क्षेत्राधिकार को अलग-अलग रेखांकित किया:
| एजेंसी | क्षेत्राधिकार और अधिकार |
| RPF (रेलवे सुरक्षा बल) | RPF केवल रेलवे संपत्ति (गैरकानूनी कब्जा) अधिनियम, 1966 और रेलवे अधिनियम, 1989 के तहत ही केस दर्ज कर सकती है। इसका काम रेलवे संपत्ति की चोरी, अवैध कब्जे और रेलवे नियमों के उल्लंघन तक सीमित है। |
| GRP (सरकारी रेलवे पुलिस) / जिला पुलिस | भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आने वाले सभी आपराधिक मामलों (जैसे चोरी, डकैती, मारपीट, जहरखुरानी आदि) में FIR दर्ज करने और जांच का अधिकार केवल GRP या राज्य पुलिस के पास है। |
कानून-व्यवस्था ‘राज्य का विषय’: रेल मंत्री
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार ‘पुलिस’ और ‘कानून-व्यवस्था’ (Law and Order) पूरी तरह से राज्य सरकार का विषय है:
RPF की भूमिका: RPF का मुख्य कार्य GRP और जिला पुलिस के प्रयासों को पूरक बनाना है। यदि RPF के सामने BNS से जुड़ा कोई आपराधिक मामला आता है, तो वह उसे तुरंत संबंधित GRP या जिला पुलिस को सौंप देती है।
GRP का वित्तपोषण: यद्यपि GRP के 50 प्रतिशत वेतन का खर्च भारतीय रेलवे उठाता है, फिर भी GRP प्रशासनिक रूप से संबंधित राज्य सरकार के अधीन ही काम करती है।

