कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में कथित घोटालों और जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर घमासान थमता नजर नहीं आ रहा है। पश्चिम बंगाल पुलिस की अपराध जांच शाखा (CID) ने करोड़ों रुपये के कथित जमीन धोखाधड़ी (Land Fraud) के एक मामले में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के बेहद करीबी सहयोगी सुमित रॉय के खिलाफ ‘लुकआउट नोटिस’ (Lookout Notice) जारी कर दिया है। यह बड़ी दंडात्मक कार्रवाई तब की गई है जब सुमित रॉय पिछले कई दिनों से लगातार फरार चल रहे हैं और सीआईडी के बार-बार समन भेजने तथा अदालत द्वारा वारंट जारी किए जाने के बावजूद जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए हैं।
कई ठिकानों पर छापेमारी नाकाम; सोमवार को जारी हुआ था अरेस्ट वारंट
सीआईडी (CID) के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सुमित रॉय की टोह लेने के लिए उनके पैतृक आवास सहित राज्य भर में उनसे जुड़े कई संभावित ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान (Raid) चलाया गया था। हर जगह नाकामी हाथ लगने के बाद अंततः उनके देश छोड़कर भागने की आशंका को देखते हुए सभी हवाई अड्डों और बंदरगाहों को अलर्ट करते हुए यह लुकआउट नोटिस जारी किया गया। हालांकि, राज्य की इस शीर्ष जांच एजेंसी ने इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई के संबंध में अभी तक मीडिया के सामने कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। गौरतलब है कि इससे ठीक पहले, सोमवार (15 जून 2026) को ही स्थानीय अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सुमित रॉय के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट (Non-Bailable Warrant) जारी किया था।
बचाव में सुमित रॉय पहुंचे कलकत्ता हाई कोर्ट; अग्रिम जमानत की अर्जी
दूसरी तरफ, सीआईडी के इस कड़े कानूनी शिकंजे से बचने के लिए सुमित रॉय ने तुरंत न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपने वकीलों के माध्यम से कलकत्ता हाई कोर्ट में गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत याचिका (Anticipatory Bail Plea) दायर की है। सुमित रॉय के कानूनी दल ने जस्टिस जॉय सेनगुप्ता की एकल पीठ के समक्ष इस मामले को बेहद जरूरी बताते हुए तुरंत मेंशन किया है। कानूनी सूत्रों के मुताबिक, हाई कोर्ट की इस पीठ के समक्ष सुमित रॉय की अग्रिम जमानत याचिका पर इस सप्ताह के अंत तक विस्तृत सुनवाई होने की पूरी संभावना है।
अभिषेक बनर्जी के ‘कालीघाट’ आवास के पास मिली थी मोबाइल लोकेशन!
इस पूरे मामले में सबसे सनसनीखेज मोड़ शनिवार की सुबह आया, जब सीआईडी के डिजिटल विंग और जांचकर्ताओं ने कोलकाता के हाई-सिक्योरिटी जोन कालीघाट स्थित टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के आधिकारिक आवास के आसपास के परिसर में अचानक तलाशी ली। सीआईडी अधिकारी ने इस औचक तलाशी की विधिक वजह स्पष्ट करते हुए बताया कि तकनीकी सर्विलांस के दौरान ट्रैक किए जा रहे सुमित रॉय से जुड़े एक सक्रिय मोबाइल फोन की आखिरी टावर लोकेशन ठीक इसी पते और क्षेत्र के आसपास दर्ज की गई थी। इसी पुख्ता इनपुट के आधार पर वहां तत्काल रेड की गई, लेकिन सुमित रॉय पुलिस के पहुंचने से पहले ही वहां से खिसक चुके थे।
मेदिनीपुर के पूर्व विधायक सुजय हाजरा से पूछताछ में खुला ‘राज’
सीआईडी सूत्रों के मुताबिक, इस बड़े जमीन घोटाले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब जांच एजेंसी ने मेदिनीपुर के पूर्व तृणमूल विधायक सुजय हाजरा को पुख्ता सबूतों के आधार पर गिरफ्तार किया था। सलाखों के पीछे बंद पूर्व विधायक सुजय हाजरा से जब सीआईडी की विशेष टीम ने कस्टडी के दौरान गहन पूछताछ की, तो उन्होंने इस पूरी जमीन धोखाधड़ी की सिंडिकेट चेन में मुख्य रणनीतिकार के रूप में सुमित रॉय के नाम का सनसनीखेज खुलासा किया।
अधिकारियों ने बताया कि जांचकर्ता इस पूरे सिंडिकेट में सुमित रॉय की वास्तविक वित्तीय और प्रशासनिक भूमिका की गहराई से कड़ियां जोड़ रहे हैं, और उन्हें जल्द से जल्द कानून के दायरे में लाकर पूछताछ की मेज पर बैठाने के लिए हर संभव कानूनी प्रयास किए जा रहे हैं।

