चेन्नई: नई शिक्षा नीति (एनईपी) को लेकर जारी बहस के बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चाहे केंद्र सरकार तमिलनाडु को 10,000 करोड़ रुपये की पेशकश भी कर दे, फिर भी राज्य में एनईपी लागू नहीं किया जाएगा।
स्टालिन का बड़ा बयान, केंद्र पर निशाना
- स्टालिन ने कहा कि नई शिक्षा नीति तमिलनाडु के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
- उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार एनईपी के जरिए शिक्षा प्रणाली को केंद्रीकृत करना चाहती है।
- उन्होंने कहा, “हमारी सरकार तमिलनाडु की अनूठी शिक्षा प्रणाली की रक्षा करेगी और इसे कमजोर नहीं होने देगी।”
तमिलनाडु सरकार का एनईपी पर रुख
- तमिलनाडु एनईपी का शुरू से विरोध करता आया है और राज्य सरकार इसे शिक्षा के विकेंद्रीकरण के खिलाफ मानती है।
- स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह एनईपी को खारिज करती है।
- तमिलनाडु में पहले से ही एक अलग शिक्षा प्रणाली है, जिसे राज्य सरकार बदलने के पक्ष में नहीं है।
एनईपी को लेकर तमिलनाडु की मुख्य आपत्तियां
✔️ केंद्रीकरण: तमिलनाडु सरकार का मानना है कि एनईपी से शिक्षा का नियंत्रण केंद्र के हाथों में चला जाएगा।
✔️ तीन भाषा फार्मूला: तमिलनाडु केवल तमिल और अंग्रेजी की शिक्षा प्रणाली को मान्यता देता है, जबकि एनईपी हिंदी को बढ़ावा देता है।
✔️ स्वायत्तता का नुकसान: राज्य सरकार को डर है कि नई नीति के लागू होने से स्थानीय शिक्षा प्रणाली पर राज्य का नियंत्रण कम हो जाएगा।
✔️ सामाजिक न्याय: डीएमके सरकार का मानना है कि एनईपी से सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को नुकसान हो सकता है।
एनईपी पर राष्ट्रीय बहस
- केंद्र सरकार का दावा है कि एनईपी 2020 शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधार लाने के लिए बनाई गई है।
- कई राज्यों ने एनईपी को आंशिक रूप से लागू किया है, लेकिन तमिलनाडु और केरल जैसे कुछ राज्यों ने इसका विरोध किया है।
- तमिलनाडु ने इसके विकल्प के रूप में अपनी स्वयं की शिक्षा नीति बनाने की घोषणा भी कर दी है।
क्या होगा आगे?
✅ तमिलनाडु सरकार अपने राज्य आधारित शिक्षा मॉडल को ही आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी।
✅ केंद्र और राज्य के बीच एनईपी को लेकर टकराव और बढ़ सकता है।
✅ तमिलनाडु सरकार संभवतः एक अलग “राज्य शिक्षा नीति” (एसएसपी) बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
निष्कर्ष
तमिलनाडु सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी परिस्थिति में एनईपी को लागू नहीं करेगी। चाहे केंद्र से आर्थिक मदद मिले या कोई और प्रलोभन दिया जाए, राज्य अपनी मौजूदा शिक्षा प्रणाली से समझौता नहीं करेगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या यह विवाद राजनीतिक रूप से और गहराता है?

