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Saturday, June 13, 2026

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असम सरकार का बड़ा फैसला: 18 वर्ष से ऊपर के वयस्कों को अब नहीं मिलेगा आसानी से आधार कार्ड; अवैध घुसपैठ पर रोक के लिए नियम सख्त

गुवाहाटी: असम में अवैध प्रवासियों और बांग्लादेशी घुसपैठ पर पूरी तरह नकेल कसने के लिए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की सरकार ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य सरकार ने 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी वयस्कों को सामान्य प्रक्रिया के तहत नए आधार कार्ड जारी करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। शनिवार (13 जून 2026) को हुई असम कैबिनेट (State Cabinet) की महत्वपूर्ण बैठक के बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने खुद मीडिया को इस बड़े निर्णय की आधिकारिक जानकारी दी।

अब सामान्य प्रक्रिया बंद; जिला उपायुक्त (DC) की जांच के बाद ही मिलेगी मंजूरी

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुसार, अब असम में कोई भी वयस्क नागरिक सामान्य आधार केंद्रों पर जाकर नया आधार कार्ड नहीं बनवा सकेगा। इस नीतिगत बदलाव का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी अवैध प्रवासी या विदेशी नागरिक भारतीय पहचान का यह महत्वपूर्ण दस्तावेज धोखाधड़ी से हासिल न कर सके।

नई व्यवस्था के तहत, यदि किसी जायज भारतीय नागरिक का आधार कार्ड किन्हीं कारणों से अब तक नहीं बन पाया है और वह 18 वर्ष से अधिक आयु का है, तो उसे एक विशेष और कठिन विधिक प्रक्रिया से गुजरना होगा:

  • विशेष परिस्थितियों में आवेदक को अपने जिले के उपायुक्त (District Commissioner – DC) के समक्ष आवेदन करना होगा।
  • जिला उपायुक्त उस आवेदन और नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों की सघन जमीनी जांच करेंगे।
  • इसके बाद उपायुक्त द्वारा संबंधित मामले का एक आधिकारिक प्रस्ताव राज्य सरकार के गृह विभाग के पास भेजा जाएगा।
  • राज्य सरकार के स्तर पर विस्तृत वेरिफिकेशन के बाद यदि व्यक्ति पात्र पाया जाता है, तभी उसे आधार कार्ड जारी करने की विशेष अनुमति दी जाएगी।

100% से अधिक आधार कवरेज पर सीएम ने जताई गहरी चिंता

कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने असम के कुछ विशिष्ट सीमावर्ती और जनसांख्यिकीय जिलों में आधार डेटा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “राज्य में आधार कार्ड जारी करने की प्रक्रिया लगभग अपने चरम (Saturated) स्तर पर पहुंच चुकी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि असम के कुछ जिलों में आधार कार्ड का कवरेज वहां की कुल अनुमानित आबादी से भी 100 प्रतिशत से अधिक हो गया है।” उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि सरकार को अब यह सघन जांच करनी होगी कि ये अतिरिक्त आधार कार्ड हासिल करने वाले लोग वास्तव में कौन हैं और वे कहां से आए हैं। यह कदम विशेष रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया है ताकि असम की धरती पर रह रहे अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को चिन्हित किया जा सके।

चाय बागान और अनुसूचित जनजातियों (ST) को 1 अप्रैल 2027 तक विशेष छूट
असम सरकार ने राज्य के कुछ मूल निवासी समुदायों के पिछड़ेपन को देखते हुए इस कड़े कानून में एक अस्थायी राहत भी दी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि चाय बागान समुदाय (Tea Garden Community) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लोगों को फिलहाल इस पाबंदी से बाहर रखा गया है, क्योंकि इन सुदूरवर्ती समुदायों के कई स्थानीय नागरिकों के पास जागरूकता के अभाव में अभी भी आधार कार्ड नहीं बन पाए हैं।
हालांकि, सीएम सरमा ने स्पष्ट विधिक समय-सीमा तय करते हुए कहा कि यह छूट भी केवल एक सीमित अवधि के लिए ही मान्य होगी। 1 अप्रैल 2027 से यह विशेष छूट पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। उस तय तारीख के बाद इन आरक्षित समुदायों के भी 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को आधार कार्ड प्राप्त करने के लिए उसी कठिन ‘डीसी वेरिफिकेशन’ प्रक्रिया से गुजरना होगा।

नाबालिगों के लिए जारी रहेगी पुरानी व्यवस्था; सीएम ने पहले ही दिए थे संकेत

इस नए आदेश में असम सरकार ने बच्चों और किशोरों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने साफ किया है कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के बाल आधार और नए नामांकन की प्रक्रिया पहले की तरह ही सामान्य केंद्रों पर सुचारू रूप से जारी रहेगी, क्योंकि उनके पास माता-पिता के वैध दस्तावेज मौजूद होते हैं।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा पिछले एक वर्ष से असम में नागरिकता और पहचान पत्रों के नियमों को और अधिक सख्त बनाने के संकेत दे रहे थे। उन्होंने पिछले साल ही स्पष्ट कर दिया था कि बांग्लादेश से होने वाली अवैध घुसपैठ को रोकने के उद्देश्य से वयस्कों के लिए आधार कार्ड जारी करने की पात्रता और नियमों को कड़ा करने पर विधायी स्तर पर विचार चल रहा है, जिसे अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद पूरी तरह लागू कर दिया गया है।

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