नई दिल्ली/कोलकाता: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मतदाता सूची (Voter List) में नाम दर्ज कराने और उसकी विधिक शुद्धता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया से जुड़े नियमों में एक अत्यंत महत्वपूर्ण विधिक बदलाव किया है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि अब केवल कुछ मौजूदा मतदाताओं को ही नहीं, बल्कि मतदाता सूची में नाम जुड़वाने वाले सभी नए आवेदकों को भी अपने माता-पिता की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ी जानकारी देना अनिवार्य (Mandatory) होगा।
चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, इस नई विधिक व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य मतदाताओं की सटीक मैपिंग (Mapping) करना और आवेदन के समय जमा किए जाने वाले दस्तावेजों (Documents) की संख्या को कम करना है।
1. नए आवेदकों के लिए फॉर्म-6 और घोषणा-पत्र का विधिक नियम
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किए गए नए प्रशासनिक व विधिक निर्देशों के तहत इस प्रक्रिया को पूरी तरह अनिवार्य बना दिया गया है:
- घोषणा-पत्र की अनिवार्यता: मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए नए आवेदकों द्वारा भरे जाने वाले फॉर्म-6 (Form-6) के साथ अब माता-पिता की SIR (Special Intensive Revision) जानकारी वाला घोषणा-पत्र संलग्न करना विधिक रूप से आवश्यक होगा।
- फॉर्म के प्रारूप में कोई बदलाव नहीं: चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मुख्य विधिक फॉर्म-6 के मूल प्रारूप में कोई बदलाव या संशोधन नहीं किया गया है। इस घोषणा-पत्र को अतिरिक्त विधिक निर्देशों के माध्यम से जोड़ा गया है।
- ऑनलाइन आवेदन पर रोक: यदि कोई नागरिक ऑनलाइन माध्यम से फॉर्म-6 भरता है, तो जब तक वह माता-पिता की SIR से जुड़े घोषणा-पत्र की जानकारी दर्ज नहीं करेगा, उसका आवेदन पोर्टल पर आगे प्रोसेस (सबमिट) नहीं हो सकेगा।
2. बिहार मॉडल से प्रेरणा और मैपिंग के विधिक लाभ
इस व्यवस्था को पूरे देश में लागू करने से पहले एक सफल प्रायोगिक विधिक परीक्षण (Pilot Project) किया गया था, जिसका विवरण नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट है:
| विधिक चरण व इतिहास | प्रक्रिया का स्वरूप और प्रशासनिक लाभ |
|---|---|
| बिहार एसआईआर मॉडल | इस विशेष घोषणा-पत्र को पिछले वर्ष जून (2025) में बिहार की एसआईआर प्रक्रिया में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर जोड़ा गया था, जहाँ दैनिक एसआईआर बुलेटिन में इसे शामिल किया जाता था। |
| बेहतर वोटर मैपिंग | माता-पिता के डेटा के जुड़ने से निर्वाचन अधिकारियों को एक ही परिवार के मतदाताओं को एक साथ मैप करने में पूर्ण विधिक सहायता मिलती है। |
| दस्तावेजों में कमी | इस विधिक घोषणा-पत्र के अनिवार्य होने के बाद, नए मतदाताओं को अपनी पहचान और निवास के सत्यापन के लिए अत्यधिक सहायक दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। |
3. संयुक्त राष्ट्र (UN) की चिंताओं पर चुनाव आयोग का विधिक जवाब
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र (UN) के विशेष रिपोर्टर्स द्वारा भारत की इस विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठाए गए सवालों और चिंताओं को चुनाव आयोग ने विधिक रूप से पूरी तरह खारिज कर दिया है:
UN चिंताओं पर आयोग का विधिक रुख⎩⎨
⎧1. संवैधानिक वैधता:2. प्रक्रिया का मूल उद्देश्य:3. भेदभाव के आरोपों का खंडन:चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, संवैधानिक है और इसे **सुप्रीम कोर्ट** की विधिक मंजूरी प्राप्त है।सभी पात्र नागरिकों को जोड़ना तथा डुप्लीकेट, मृत, स्थानांतरित और विदेशी मतदाताओं के नाम सूची से हटाना है।नंदीग्राम (पश्चिम बंगाल) जैसे क्षेत्रों में अल्पसंख्यक नामों को हटाए जाने के आरोपों पर कहा कि सभी को आपत्ति दर्ज कराने के विधिक अवसर दिए गए थे।
4. मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाने की दिशा में रणनीतिक कदम
चुनाव आयोग के इस कड़े और व्यावहारिक कदम से देश की मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिहीन और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी। जाली या दोहरी नागरिकता के आधार पर बनने वाले फर्जी वोटर कार्डों पर रोक लगाने के लिए माता-पिता की विधिक SIR मैपिंग एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित होगी। चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि वह देश की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की विधिक शुचिता से कोई समझौता नहीं करेगा और विदेशी संस्थाओं या रिपोर्टर्स के बिना तथ्यों वाले आरोपों का विधिक रूप से जवाब देता रहेगा।

