कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दिल्ली में सीजेपी (CJP) के संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर जरूरत पड़ी, तो वह खुद दिल्ली जाकर सीजेपी के आंदोलन में शामिल होंगी। मंगलवार को कोलकाता में टीएमसी की वार्षिक ’21 जुलाई शहीद दिवस’ रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने केंद्र की भाजपा सरकार पर लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का आरोप लगाया।
‘प्रधानमंत्री ने कार घुमा ली और चले गए’
ममता बनर्जी ने दिल्ली में हुई झड़पों का जिक्र करते हुए दावा किया कि जब प्रदर्शनकारी छात्र संसद परिसर के करीब पहुंचे, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी कार घुमाकर वहां से चले गए। ममता ने कहा कि केंद्र सरकार ने छात्रों के आंदोलन पर लाठी और आंसू गैस का इस्तेमाल कर लोकतंत्र के प्रति अपनी असहिष्णुता जाहिर की है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब देश का युवा सवाल पूछता है, तो सरकार संवाद के बजाय तानाशाही का रास्ता अपनाती है।
कोविड जांच और धार्मिक भेदभाव पर उठाए सवाल
रैली के दौरान ममता बनर्जी ने कोविड-19 महामारी के समय हुई खरीद में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यदि निष्पक्ष जांच हुई, तो इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम भी सामने आएगा। इसके साथ ही, उन्होंने धार्मिक आयोजनों में भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि योग दिवस के लिए रेड रोड को सात दिनों तक बंद रखा गया, लेकिन बकरीद पर नमाज की इजाजत नहीं दी गई।
सीजेपी आंदोलन की क्या हैं प्रमुख मांगें?
सीजेपी का यह आंदोलन परीक्षा में कथित धांधली और नीट (NEET) पेपर लीक के विरोध में शुरू हुआ था, जो सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के बाद और तेज हो गया। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें हैं:
- सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई।
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
- कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले नीट अभ्यर्थियों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा।
उल्लेखनीय है कि सोमवार को दिल्ली में संसद मार्च के दौरान हुई हिंसक झड़पों में 118 से अधिक पुलिसकर्मी और करीब 60 प्रदर्शनकारी घायल हुए थे।

