मणिपुर में जारी राजनीतिक संकट के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्वोत्तर के प्रभारी संबित पात्रा ने बुधवार सुबह राजभवन में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात की। इसके बाद पात्रा ने भाजपा विधायकों से भी मुलाकात की। हालाँकि, राज्यपाल और पात्रा के बीच क्या बातचीत हुई, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।
यह बैठक मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के 9 फरवरी को अपने पद से इस्तीफा देने के बाद नेतृत्व संकट के बीच हुई। इससे पहले भी पात्रा के नेतृत्व में भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मुलाकात कर चुका था।
संवैधानिक संकट की संभावना: विशेषज्ञों की चेतावनी
संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मणिपुर में कोई भी सरकार बनाने का दावा नहीं करता है, तो राज्य संवैधानिक संकट की ओर बढ़ सकता है। संविधान विशेषज्ञ डॉ. पीएम त्रिपाठी ने बताया कि मणिपुर विधानसभा सक्रिय है, लेकिन नेतृत्व संकट के चलते यदि विधानसभा सत्र का आयोजन नहीं होता है, तो अनुच्छेद 174 के तहत संवैधानिक गतिरोध पैदा हो सकता है।
क्या कहता है अनुच्छेद 174:
अनुच्छेद 174 के अनुसार, राज्य के राज्यपाल को समय-समय पर विधानसभा को बैठक के लिए बुलाना होता है, लेकिन दो सत्रों के बीच अधिकतम छह महीने का अंतर हो सकता है। यदि यह अंतर बढ़ता है, तो संवैधानिक गतिरोध उत्पन्न हो सकता है और अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन ही एकमात्र विकल्प बचेगा।
क्या है अनुच्छेद 356:
अनुच्छेद 356 राष्ट्रपति को यह शक्ति देता है कि वह केंद्र सरकार की सलाह पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर सकते हैं। मणिपुर में नेतृत्व संकट को देखते हुए यह संभावना जताई जा रही है कि राष्ट्रपति शासन लागू हो सकता है।
मणिपुर विधानसभा और जातीय हिंसा की पृष्ठभूमि
राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह का इस्तीफा स्वीकार कर लिया था और उनसे वैकल्पिक व्यवस्था होने तक पद पर बने रहने का अनुरोध किया था। राज्यपाल ने मणिपुर विधानसभा के सत्र, जो 10 फरवरी को शुरू होने वाला था, उसे अमान्य घोषित कर दिया है। विधानसभा का पिछला सत्र 12 अगस्त, 2024 को समाप्त हुआ था।
मणिपुर में मई 2023 से इंफाल घाटी में मैतेई समुदाय और कुकि-जो समुदायों के बीच जातीय हिंसा के कारण 250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग बेघर हो गए हैं।
मणिपुर संकट पर कांग्रेस का हमला: गृहमंत्री अमित शाह को ठहराया जिम्मेदार
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने मणिपुर में जारी संविधानिक संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश यात्रा पर जाने पर निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, “प्रधानमंत्री विदेश यात्रा पर व्यस्त हैं, जबकि मणिपुर में संविधानिक संकट है।” उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मणिपुर संकट के लिए जिम्मेदार ठहराया और आरोप लगाया कि स्थिति को वर्षों से सही तरीके से नहीं संभाला गया।
गोगोई ने कहा कि मणिपुर की वर्तमान स्थिति सरकार की विफलता को दर्शाती है और संकट को हल करने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

