रायपुर/नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित और करोड़ों रुपये के कथित शराब घोटाले में अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत तीन अस्थायी कुर्की आदेश (PAO) जारी करते हुए करीब 1200 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को कुर्क कर लिया है। ईडी की चार्जशीट के मुताबिक, इस पूरे मामले में सिंडिकेट द्वारा राज्य के खजाने और जनता के साथ कुल 2883 करोड़ रुपये की विशाल धोखाधड़ी और कमीशनखोरी को अंजाम दिया गया था।
अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर का सिंडिकेट; ₹30 करोड़ की बेनामी संपत्ति जब्त
ईडी की यह जांच रायपुर स्थित ईओडब्ल्यू (EOW) और एसीबी (ACB) द्वारा दर्ज मूल प्राथमिकियों (FIR) पर आधारित है। जांच में खुलासा हुआ है कि सेवानिवृत्त आईएएस अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर के नेतृत्व में एक संगठित शराब सिंडिकेट काम कर रहा था। इस सिंडिकेट ने साल 2019 से 2023 के बीच राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों, डिस्टिलरी (शराब भट्टी) मालिकों और निजी कंपनियों के साथ सांठगांठ कर पूरे उत्पाद शुल्क तंत्र में हेरफेर किया।
पहले कुर्की आदेश के तहत विकास अग्रवाल और अनवर ढेबर की संपत्तियां जब्त की गई हैं। विकास अग्रवाल इस सिंडिकेट के जमीनी स्तर के वित्तीय प्रबंधक थे, जो भट्टियों से अवैध कमीशन वसूलकर सीधे अनवर ढेबर तक पहुंचाते थे। इस आदेश के तहत रायपुर के ढेबर सिटी होम्स में कई भूखंड और विभिन्न शेल कंपनियों के नाम पर दर्ज अनवर ढेबर की लगभग 30 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्तियां अटैच की गई हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे चैतन्य बघेल के इशारे पर गोवा के होटल में निवेश
इस घोटाले के राजनीतिक संबंध भी उजागर हुए हैं। ईडी ने इस मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल से कड़ाई से पूछताछ की है। दूसरे कुर्की आदेश के तहत उत्तरी गोवा के अंजुना गांव में स्थित प्रीमियम ‘होटल वेस्टिन गोवा’ (Hotel Westin Goa) को अटैच किया गया है।
जांच में स्थापित हुआ है कि इस आलीशान होटल को पूरी तरह से अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) से लगभग 110 करोड़ रुपये में अधिग्रहित किया गया था। इस सौदे के लिए शराब घोटाले से उगाही गई करोड़ों रुपये की बेनामी नकदी का भुगतान किया गया था, जिसे कथित तौर पर चैतन्य बघेल के सीधे इशारे पर भौतिक रूप से ठिकाने लगाया गया था।
मुनाफे का 50-60% हिस्सा देने पर किया मजबूर; आरोपियों की संख्या 85 पहुंची
तीसरे कुर्की आदेश के तहत ईडी ने तीन बड़ी एफएल-10ए (FL-10A) लाइसेंसधारी कंपनियों— मेसर्स ओम साई बेवरेजेज, मेसर्स दिशिता वेंचर्स और मेसर्स नेक्सजेन पावर इंजीटेक के बैंक खातों, शेयरों और म्यूचुअल फंडों को फ्रीज कर दिया है। इन कंपनियों को अपने वैध मुनाफे का 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा (लगभग 51 करोड़ रुपये) जबरन सिंडिकेट को देने के लिए मजबूर किया गया था।
इसके साथ ही ईडी ने रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में अपनी छठी पूरक चार्जशीट (Supplementary Charge Sheet) दाखिल की है, जिसमें व्यवसायी विजय भाटिया, टी. भुवनेश्वर राव, प्रोबीर शर्मा और निखिल चंद्रकार सहित चार नए लोगों को नामजद किया गया है। इस नई चार्जशीट के बाद शराब घोटाले में कुल आरोपियों की संख्या बढ़कर अब 85 हो गई है।

