कोलकाता: आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (RG Kar Medical College and Hospital) में महिला डॉक्टर के साथ हुए वीभत्स दुष्कर्म और हत्या के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने बेहद सख्त और तल्ख रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने गुरुवार (25 जून 2026) को इस जघन्य वारदात के पीछे की कथित विधिक व आपराधिक साजिश को लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट पर खुली नाराजगी जताई।
जस्टिस शंपा सरकार और जस्टिस तीर्थंकर घोष की खंडपीठ ने दोटूक शब्दों में कहा कि वह अब तक की जांच की रफ्तार, दिशा और प्रगति से विधिक रूप से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं है।
“अक्टूबर से खिंच रहा है मामला, अब और विधिक देरी बर्दाश्त नहीं”
कलकत्ता हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सीबीआई की नई स्टेटस रिपोर्ट को विधिक रूप से अपर्याप्त मानते हुए खारिज कर दिया। अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह गंभीर आपराधिक मामला पिछले साल अक्टूबर (2025) से लगातार खिंच रहा है।
अदालत ने सख्त विधिक आदेश जारी करते हुए कहा:
“इस संवेदनशील और राष्ट्रीय महत्व के मामले को अब और अधिक समय के लिए लटकाया नहीं जा सकता। सीबीआई बिना किसी विधिक शिथिलता के अपनी जांच को तत्काल प्रभाव से किसी तार्किक और ठोस अंजाम (Logical Conclusion) तक पहुंचाए।”
हाईकोर्ट का कड़ा अल्टीमेटम: सीलबंद लिफाफे में मांगा सारा विधिक रिकॉर्ड
खंडपीठ ने केंद्रीय जांच एजेंसी को एक अंतिम विधिक अल्टीमेटम जारी करते हुए कड़े निर्देश दिए हैं:
- सीलबंद साक्ष्य: सीबीआई अगली सुनवाई पर इस मामले की जांच से जुड़े सभी मूल दस्तावेज, वैज्ञानिक सबूत, फॉरेंसिक रिपोर्ट और आधिकारिक केस डायरी (Case Diary) सीलबंद लिफाफे में सीधे अदालत के समक्ष पेश करे।
- केवल पूछताछ काफी नहीं: अदालत ने स्पष्ट किया कि पिछले विधिक आदेश के बाद कुछ संदिग्धों और गवाहों से पूछताछ जरूर की गई है, लेकिन इस बड़े और सुनियोजित घटनाक्रम के लिहाज से यह सतही कार्रवाई कतई काफी नहीं है। मुख्य साजिशकर्ताओं के खिलाफ विधिक साक्ष्य जुटाने की गति बेहद धीमी है।
पीड़िता के माता-पिता की याचिका और SIT का गठन
यह पूरी कानूनी कशमकश और न्यायिक कड़ा रुख उस वक्त शुरू हुआ जब मृतका के माता-पिता ने हाईकोर्ट में एक विधिक याचिका दायर की थी।
- साक्ष्य मिटाने का आरोप: पीड़ित परिवार का सीधा और गंभीर विधिक आरोप था कि घटना की रात से लेकर पीड़िता के अंतिम संस्कार तक, अस्पताल प्रशासन और कुछ स्थानीय विधिक कड़ियों द्वारा एक सोची-समझी साजिश (Pre-planned Conspiracy) के तहत डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों को नष्ट किया गया।
- विशेष एसआईटी: इसी याचिका का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने मई महीने में सीबीआई के जॉइंट डायरेक्टर (Joint Director) की अगुवाई में एक विशेष तीन सदस्यीय एसआईटी (SIT) का गठन किया था। हालांकि, इस एसआईटी की ढीली विधिक रफ्तार पर अब अदालत का गुस्सा फूटा है, और मामले को जल्द फास्ट-ट्रैक मोड पर लाने का निर्देश दिया गया है।

