पार्टी की छवि बचाने के लिए स्वेच्छा से पद छोड़ने का दावा, डीके शिवकुमार ने बताया बेकसूर
बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार में अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री बी नागेंद्र ने महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित वित्तीय अनियमितताओं के चलते अपने पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी है। भाजपा इस मामले को लेकर लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रही थी और उनके इस्तीफे की मांग पर अड़ी हुई थी। नागेंद्र ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पार्टी को किसी भी असहज स्थिति और शर्मिंदगी से बचाने के लिए स्वेच्छा से यह फैसला लिया है।
इस्तीफे के बाद भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए नागेंद्र ने खुद को विपक्षी दल की राजनीति का शिकार बताया और कहा कि वे झूठी धमकियों से डरने वाले नहीं हैं।
‘नागेंद्र बेकसूर हैं, भाजपा ने जानबूझकर बनाया निशाना’: डीके शिवकुमार उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बी नागेंद्र पूरी तरह निर्दोष हैं। उन्होंने कहा, “मैंने मामले से जुड़ी रिपोर्टों की समीक्षा की है और बातचीत की है। भाजपा द्वारा चार बार के जनप्रिय नेता को इस तरह निशाना बनाए जाने से पूरे समुदाय को ठेस पहुंची है।” शिवकुमार ने बताया कि नागेंद्र इस दुर्भावनापूर्ण अभियान से बेहद आहत हैं और इसी वजह से उन्होंने पद छोड़ने का कदम उठाया है।
क्या है महर्षि वाल्मीकि विकास निगम का मामला? यह विवाद मई 2024 में तब प्रकाश में आया था, जब निगम के लेखा अधिकारी पी. चंद्रशेखरन के निधन के बाद एक नोट बरामद हुआ था। नोट में निगम के आधिकारिक बैंक खातों से अवैध तरीके से बड़ी रकम को कई निजी खातों में ट्रांसफर किए जाने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, मामले में लगभग 89.63 करोड़ रुपये के अनधिकृत हस्तांतरण और कुल मिलाकर करीब 187 करोड़ रुपये के कथित हेरफेर की जांच की जा रही है, जिस पर अंतिम न्यायिक फैसला आना अभी बाकी है।

