गुवाहाटी: असम पुलिस ने राजधानी गुवाहाटी में एक बड़ी विधिक और सुरक्षात्मक कामयाबी हासिल करते हुए एक बड़े अंतरराज्यीय नकली नोट गिरोह (Inter-State Counterfeit Currency Racket) का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने असम की धरती पर जाल बिछाकर उत्तर प्रदेश के रहने वाले तीन शातिर तस्करों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
इन आरोपियों के कब्जे से 10.90 लाख रुपये मूल्य की नकली भारतीय मुद्रा (FICN) बरामद की गई है। पुलिस को विधिक संदेह है कि इस गिरोह के तार देश के कई अन्य राज्यों से जुड़े हुए हैं, जिसके चलते विभिन्न राज्यों की पुलिस टीमों के साथ मिलकर एक व्यापक नेटवर्क जांच शुरू कर दी गई है।
1. यूपी नंबर की गाड़ी और 500 के जाली नोट: ऐसे मिली गुप्त विधिक सूचना
इस हाई-प्रोफाइल विधिक कार्रवाई को गुवाहाटी पुलिस ने बेहद गोपनीय खुफिया इनपुट के आधार पर अंजाम दिया:
- सटीक खुफिया जानकारी: गुवाहाटी पुलिस को बुधवार (1 जुलाई 2026) को एक विशेष गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी कि उत्तर प्रदेश से नकली नोटों की एक बड़ी खेप शहर में प्रवेश कर रही है।
- सिक्स माइल पर नाकेबंदी: सूचना के आधार पर पुलिस की विधिक टीमों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गुवाहाटी के सिक्स माइल स्थित पंजाबी रोड पर कड़ा पहरा बैठाया और वहां से गुजर रही एक संदिग्ध गाड़ी को रोका।
- बरामदगी: यह गाड़ी उत्तर प्रदेश के विधिक पंजीकरण नंबर (UP-35 BV-8240) की थी। जब पुलिस बल ने वाहन की सघन तलाशी ली, तो उसमें से 500-500 रुपये के उच्च गुणवत्ता वाले नकली नोट बरामद हुए, जिनकी कुल विधिक गिनती करने पर मूल्य 10.90 लाख रुपये आंका गया।
2. गिरफ्तार आरोपियों की विधिक पहचान
पकड़े गए तीनों आरोपी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के निवासी हैं और पूर्वोत्तर भारत में इस अवैध कारोबार को फैलाने की फिराक में थे:
गिरफ्तार तस्करों का विवरण 1. अनुज गुप्ता (उम्र 34 वर्ष):2. महेश शुक्ला (उम्र 32 वर्ष):3. रोशन गुप्ता (उम्र 28 वर्ष):निवासी – उन्नाव, उत्तर प्रदेशनिवासी – कानपुर, उत्तर प्रदेशनिवासी – कानपुर, उत्तर प्रदेश
3. बड़े विधिक नेटवर्क और फंडिंग की जांच शुरू
- गहन पूछताछ: पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत विधिक धाराओं के तहत मामला पंजीकृत कर उन्हें रिमांड पर ले लिया है। गुवाहाटी पुलिस की विशेष टीमें इनसे कड़ी पूछताछ कर रही हैं।
- अंतरराज्यीय संबंध: प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि ये नकली नोट उत्तर प्रदेश या सीमा पार के किसी प्रिंटिंग सेटअप से लाए गए थे और इन्हें असम के स्थानीय बाजारों में खपाया जाना था। पुलिस अब इनके स्थानीय संपर्कों (Local Links) और वित्तीय लेन-देन के विधिक रिकॉर्ड को खंगाल रही है ताकि इस गिरोह के सरगना तक पहुंचा जा सके।

